चैत्र नवरात्रि 2026 — पूजा विधि, कलश स्थापना मुहूर्त, 9 देवी और व्रत नियम | Shree GangaSagar
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🕉चैत्र नवरात्रि 2026
सम्पूर्ण पूजा विधि, 9 देवियों के नाम, व्रत नियम और शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि 2026: तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, व्रत विधि और माँ दुर्गा के 9 रूपों का महत्व
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इसी पावन दिन से हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आरंभ भी होता है। वसंत ऋतु में आने के कारण इसे 'वासंतिक नवरात्रि' भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि मार्च के महीने में मनाई जाएगी।
चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन केवल माँ शैलपुत्री की पूजा का ही नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली विक्रम संवत 2083 के उदय का भी प्रतीक है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस नए संवत्सर को नई ऊर्जा और संकल्पों का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आता है।
यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की विशेष पूजा और उपासना की जाती है।
ShreeGangasagar.com के समस्त पाठकों को हिंदू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! माँ दुर्गा की कृपा से यह नया साल आप सभी के लिए समृद्धि, स्वास्थ्य और अटूट सुख-शांति लेकर आए।
चैत्र नवरात्रि हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है।
2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारम्भ होकर 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। यह समय साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि का सर्वश्रेष्ठ अवसर है।
चैत्र नवरात्रि 2026 — 9 दिन, 9 देवी, तिथि सारणी
कलश स्थापना विधि — 19 मार्च 2026
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
कलश स्थापना से पहले निम्नलिखित सामग्री एकत्र कर लें:
मिट्टी या तांबे का कलश
गंगाजल या शुद्ध जल
आम के पत्ते (5 या 7)
नारियल (लाल कपड़े में लपेटा हुआ)
अक्षत (साबुत चावल), रोली, मौली
पुष्प, दूर्वा, पंचमेवा
जौ (जवारे उगाने के लिए मिट्टी सहित)
सुपारी, पान, लौंग, इलायची
कलश स्थापना की चरण-दर-चरण विधि
पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लाल या पीला आसन बिछाएं।
मिट्टी की वेदी बनाएं और उसमें जौ बोएं — यही नवरात्रि में जवारे बनेंगे।
वेदी पर कलश स्थापित करें। कलश में गंगाजल, अक्षत, सुपारी, सिक्का और पुष्प डालें।
कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और नारियल स्थापित करें।
कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें।
माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
धूप-दीप जलाएं और 'ॐ शैलपुत्र्यै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
माँ को फल, मिठाई और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
नवरात्रि के नौ दिन — माँ के 9 स्वरूप, मंत्र और महत्व
1. माँ शैलपुत्री (प्रतिपदा)
माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। 'शैल' का अर्थ है पर्वत — पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहते हैं। इनका वाहन वृषभ (नंदी) है और हाथ में त्रिशूल तथा कमल है।
2. माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीया)
माँ ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और वैराग्य की देवी हैं। इनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमण्डल है। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
3. माँ चंद्रघण्टा (तृतीया)
माँ चंद्रघण्टा के मस्तक पर अर्धचन्द्र है जो घण्टे के समान है, इसीलिए इन्हें चंद्रघण्टा कहते हैं। ये दस भुजाधारी हैं और सिंह पर सवार हैं। इनकी उपासना से साहस, निर्भयता और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
4. माँ कूष्माण्डा (चतुर्थी)
5. माँ स्कंदमाता (पंचमी)
Navratri Day 5 - Maa SkandaMata

माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माँ हैं। ये सिंह पर विराजमान हैं और गोद में बालक कार्तिकेय को लिए हुए हैं। इनकी उपासना से संतान सुख, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
6. माँ कात्यायनी (षष्ठी)
माँ कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित हुई थीं। इन्होंने महिषासुर का वध किया था। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इनकी विशेष पूजा करती हैं।
7. माँ कालरात्रि (सप्तमी)
माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र है — काला रंग, बिखरे केश, चार हाथों में शस्त्र और गर्दभ (गधे) पर सवारी। परन्तु इनका हृदय दयालु है। ये दुष्टों का नाश करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं।
8. माँ महागौरी (अष्टमी) — कन्या पूजन और हवन
माँ महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (श्वेत) है। ये वृषभ पर सवार हैं और इनके हाथ में डमरू तथा त्रिशूल है। अष्टमी को कन्या पूजन का विशेष महत्व है — 9 कन्याओं को देवी के 9 रूपों के समान पूजकर भोजन कराएं।
9. माँ सिद्धिदात्री (नवमी) — राम नवमी
माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की दात्री हैं। नवमी को राम नवमी भी होती है — यह दिन अत्यंत पवित्र है। इस दिन हवन और पारण (व्रत खोलना) किया जाता है।
नवरात्रि व्रत नियम — क्या करें, क्या न करें
✅ व्रत में करें
प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान करके पूजा करें
सात्विक आहार लें — फल, दूध, कुट्टू का आटा, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा
दिन में दो बार माँ दुर्गा का ध्यान और मंत्र जाप करें
नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें
अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन अवश्य करें
❌ व्रत में न करें
मांस, मछली, अण्डा और शराब का सेवन बिल्कुल न करें
प्याज और लहसुन का उपयोग वर्जित है
क्रोध, झूठ और कटु वाणी से बचें
नाखून और बाल न काटें
चमड़े की वस्तुओं (बेल्ट, जूते) का उपयोग न करें
नवरात्रि व्रत में क्या खाएं — सम्पूर्ण भोजन सूची
नवरात्रि में पढ़ें — माँ दुर्गा की आरती
नवरात्रि व्रत एवं पूजन विधि (Navratri Puja Vidhi)
माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए नौ दिनों तक सात्विक नियमों का पालन अनिवार्य है:
- शुद्धिकरण: प्रतिपदा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (लाल या पीले रंग के) धारण करें।
- घटस्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालकर उस पर नारियल स्थापित करें।
- अखंड ज्योति: यदि संभव हो तो नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करें, अन्यथा सुबह-शाम दीपक जलाएं।
- दैनिक पूजा: प्रतिदिन माँ के स्वरूप के अनुसार मंत्र जप, दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।
- भोग: माँ को लाल फूल, श्रृंगार सामग्री और ऋतु फल अर्पित करें।
- कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन 9 छोटी कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
माँ दुर्गा के 9 रूपों के नाम और महत्व (Navadurga Names)
- माँ शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जो स्थिरता और शक्ति का प्रतीक हैं।
- माँ ब्रह्मचारिणी: तप का आचरण करने वाली, जो भक्तों को संयम और विजय प्रदान करती हैं।
- माँ चंद्रघंटा: साहस की देवी, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है।
- माँ कूष्माण्डा: ब्रह्मांड की आदि-शक्ति, जिन्होंने अपनी मुस्कान से सृष्टि उत्पन्न की।
- माँ स्कंदमाता: कार्तिकेय (स्कंद) की माता, जो वात्सल्य और ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं।
- माँ कात्यायनी: महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी, जो धर्म और अर्थ की दात्री हैं।
- माँ कालरात्रि: अंधकार का विनाश करने वाली, जो शत्रुओं का भय दूर करती हैं।
- माँ महागौरी: श्वेत वर्ण वाली अत्यंत शांत स्वरूप माँ, जो पवित्रता की प्रतीक हैं।
- माँ सिद्धिदात्री: सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली पूर्णता की देवी।
नवरात्रि व्रत आहार: क्या खाएं और क्या न खाएं? (Navratri Diet Guide)
नवरात्रि के व्रत में शरीर की शुद्धि के लिए सात्विक भोजन का विशेष महत्व है।
क्या खाएं (Vrat Food):
- अनाज: कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरी का आटा और समा के चावल।
- सब्जियां: आलू, शकरकंद, अरबी, लौकी और कच्चा केला।
- डेयरी: दूध, दही, पनीर और शुद्ध घी।
- फल: सभी प्रकार के ताजे फल और सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स)।
- मसाले: केवल सेंधा नमक, काली मिर्च और जीरा।
क्या न खाएं (Avoid):
- प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन।
- अनाज जैसे गेहूं, चावल (साधारण), दालें और बेसन।
- मांसाहार, शराब और नशीले पदार्थ।
- साधारण नमक और डिब्बाबंद जूस।
नवरात्रि व्रत कथा (Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में सुमति नामक एक कन्या अपने पिता की भूल के कारण संकट में पड़ गई थी। उसने देवी दुर्गा की कठोर भक्ति की। देवी माँ ने प्रसन्न होकर उसे उसके पूर्व जन्म का वृत्तांत सुनाया और बताया कि कैसे अनजाने में किए गए व्रत के प्रभाव से उसे सुख प्राप्त हुआ।
एक अन्य प्रमुख कथा के अनुसार, माँ दुर्गा ने 9 दिनों तक महिषासुर नामक राक्षस से भीषण युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया, जिसे हम विजयादशमी के रूप में मनाते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: चैत्र नवरात्रि 2026 कब से शुरू है?
उत्तर: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 (प्रतिपदा) से होगी और 27 मार्च 2026 (नवमी / राम नवमी) को समाप्त होगी।
प्रश्न 2: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 19 मार्च 2026 को कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त प्रातः 12:05 से 12:53 बजे तक है। इस समय में कलश स्थापना करना सबसे उत्तम माना जाता है।
प्रश्न 3: नवरात्रि व्रत में सेंधा नमक क्यों खाते हैं?
उत्तर: व्रत में सामान्य नमक (समुद्री नमक) वर्जित होता है क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है। सेंधा नमक (rock salt) पहाड़ों से निकाला जाता है और शुद्ध माना जाता है, इसलिए व्रत में इसका उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 4: कन्या पूजन किस दिन करें — अष्टमी या नवमी?
उत्तर: दोनों ही दिन कन्या पूजन का विधान है। जो लोग एक दिन करना चाहते हैं, वे अपनी सुविधा और परम्परा के अनुसार अष्टमी (26 मार्च) या नवमी (27 मार्च) को कर सकते हैं। 2-10 वर्ष की 9 कन्याओं को देवी के 9 रूप मानकर पूजा जाता है।
प्रश्न 5: नवरात्रि व्रत में रोज़ाना कितने बजे पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: नवरात्रि में प्रातःकाल (सूर्योदय के समय) और सायंकाल (सूर्यास्त के समय) — दोनों संध्याओं में पूजा करना सर्वोत्तम है। यदि दो बार संभव न हो तो कम से कम प्रातःकाल एक बार अवश्य करें।
निष्कर्ष — माँ दुर्गा का आशीर्वाद पाएं
चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा की कृपा पाने का अत्यंत शुभ अवसर है। इन नौ दिनों में विधिपूर्वक पूजा, व्रत और भक्ति करने से माँ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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