आईना शायरी | आईना पर लव शायरी | aaina love shayari collection
आईना पर लव शायरी ।आईना मेरा,
मेरे अपनों से बढ़कर निकला
जब भी मै रोया
कमबख्त मेरे साथ ही रोया।
करम ऐसे भी ना कर ये बन्दे
कि जब आइना देखे तो खुद का ही सर झुक जाए
तेरी पहली मुलाकात जिंदगी में एक बहार लाई थी,
हर आईने में तेरी तस्वीर नजर आई थी,
लोग कहते हैं प्यार में नींद उड़ जाती है,
और हमने तो नींद में ही प्यार की दुनिया बसाई थी।
✍ हर किसी के पास,अपने अपने "मायने" हैं।
खुद को छोड़,सिर्फ दूसरों के लिये ही आईने हैं..!!
✍ बेज़ान आईने का दखल ग़वाऱा नही मुझे,
मैं केवल खुद को तेरी आँखों में देखना चाहता हुँ।
✍ आईना मेरा,
मेरे अपनों से बढ़कर निकला
जब भी मै रोया
कमबख्त मेरे साथ ही रोया।
✍ आइना देख कर ये एहसास हुआ मुझे
ये मोहब्बत हुलिया बिगाड़ देती है
✍ दिल साफ करके मुलाकात की आदत डालो,
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।
✍ जब भी आईना देखोगे मेरी याद आएगी,
साथ गुज़री हर मुलाकात याद आएगी,
पल भर क लिए वक़्त ठहर जाएगा,
जब आपको मेरी कोई बात याद आएगी.
✍ ख्वाबों की तकदीर में ज़िन्दगी इतनी उलझा ली ,
कि हकीकत में रहना का सलीका ही हम भूल गये।



