आज का पंचांग 21 मार्च 2026 | शनिवार | तिथि, नक्षत्र, राहु काल, शुभ मुहूर्त | ShreeGangaSagar

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आज का पंचांग 21 मार्च 2026 (शनिवार) — तिथि, नक्षत्र, राहु काल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

🙏 जय श्री गंगे! आज 21 मार्च 2026, शनिवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि है। शनिवार को भगवान शनिदेव और हनुमान जी की उपासना का विशेष विधान है। साथ ही आज से वसन्त विषुव (Spring Equinox) भी है — दिन और रात बराबर होते हैं। इस लेख में आपको 21 मार्च 2026 का सम्पूर्ण पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहु काल, शुभ मुहूर्त और आज का धार्मिक महत्व विस्तार से मिलेगा।

⚡ आज का पंचांग — एक नज़र में

दिन
शनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया → चतुर्थी
नक्षत्र
अश्विनी → भरणी
योग
इन्द्र → वैधृति
करण
तैतिल → गरज → वणिज
पक्ष
शुक्ल पक्ष
सूर्योदय
06:24 प्रातः
सूर्यास्त
06:33 सायं
चन्द्रोदय
07:35 प्रातः
चन्द्रास्त
09:06 सायं
मूनसाइन
मेष (Aries)
विक्रम संवत
2083 सिद्धार्थी

📜 21 मार्च 2026 का सम्पूर्ण पंचांग विवरण

पंचांग तत्वविवरणसमयावधि
तिथिशुक्ल तृतीयारात 11:56 बजे तक
तिथि (बाद में)शुक्ल चतुर्थी11:56 बजे के बाद
नक्षत्रअश्विनीदोपहर 12:37 बजे तक (22 मार्च)
नक्षत्र (बाद में)भरणी12:37 बजे के बाद
योगइन्द्रदोपहर 07:01 बजे तक
योग (बाद में)वैधृति07:01 बजे के बाद
करणतैतिलप्रातः 01:14 बजे तक
करणगरजदोपहर 11:56 बजे तक
करण (बाद में)वणिज11:56 बजे के बाद
पक्षशुक्ल पक्ष
वारशनिवार (शनिवासर)

🌅 सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चन्द्र समय

घटनासमय
🌄 सूर्योदय (Sunrise)06:24 प्रातः
🌇 सूर्यास्त (Sunset)06:33 सायं
🌕 चन्द्रोदय (Moonrise)07:35 प्रातः
🌑 चन्द्रास्त (Moonset)09:06 सायं
🌿 दिन की अवधि12 घंटे 08 मिनट 36 सेकेण्ड
🌙 रात की अवधि11 घंटे 50 मिनट 13 सेकेण्ड
☀️ मध्याह्न12:28 दोपहर

🌏 वसन्त विषुव (Spring Equinox) 2026: आज 21 मार्च को वसन्त विषुव है — यानी दिन और रात लगभग बराबर हैं। हिंदू परम्परा में यह उत्तरायण का विशेष काल माना जाता है। सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश की दिशा में अग्रसर है। यह नवीन ऊर्जा, नई शुरुआत और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।

✅ 21 मार्च 2026 के शुभ मुहूर्त

किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्यवसाय आरम्भ या यात्रा के लिए नीचे दिये गये मुहूर्त विशेष लाभकारी हैं —

🌟 आज के प्रमुख शुभ समय

मुहूर्त / शुभ कालसमय
ब्रह्म मुहूर्त04:49 प्रातः से 05:37 प्रातः
प्रातः सन्ध्या05:13 प्रातः से 06:24 प्रातः
अभिजित मुहूर्त12:04 दोपहर से 12:53 दोपहर
विजय मुहूर्त02:30 दोपहर से 03:18 दोपहर
गोधूलि मुहूर्त06:32 सायं से 06:55 सायं
सायंकाल सन्ध्या06:33 सायं से 07:44 सायं
निशिता मुहूर्त12:04 रात से 12:52 रात (22 मार्च)
अमृत काल05:58 प्रातः से 07:27 प्रातः
रवि योग12:37 प्रातः (22 मार्च) से 06:23 प्रातः

💡 पूजा एवं नये कार्य के लिए: आज ब्रह्म मुहूर्त (04:49–05:37) और अमृत काल (05:58–07:27) दोनों एक साथ हैं — यह संयोग अत्यन्त दुर्लभ और शुभ है। अभिजित मुहूर्त (12:04–12:53) में नया व्यापार, गृह प्रवेश या महत्त्वपूर्ण निर्णय लेना सर्वोत्तम है। शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

⚠️ 21 मार्च 2026 के अशुभ समय — इनसे बचें

🚫 आज के अशुभ काल

अशुभ कालसमय
राहु काल ⚠️09:26 प्रातः से 10:57 प्रातः
गुलिकाई कालम06:24 प्रातः से 07:55 प्रातः
यमगण्ड02:00 दोपहर से 03:31 दोपहर
वरज्यम08:56 प्रातः से 10:24 प्रातः
दुर्मुहूर्त06:24 प्रातः से 07:13 प्रातः
दुर्मुहूर्त (2)07:13 प्रातः से 08:01 प्रातः
विदाल योग06:24 प्रातः से 12:37 (22 मार्च)
गण्ड मूल06:24 प्रातः से 12:37 दोपहर
भद्रा / बाण (चोर)रात 01:57 से (22 मार्च)

⚠️ राहु काल (09:26 – 10:57) में कोई भी नया, शुभ या महत्त्वपूर्ण कार्य आरम्भ न करें। आज प्रातः दो दुर्मुहूर्त (06:24–08:01) भी हैं — इस दौरान यात्रा, विवाह-विचार या गृह-प्रवेश न करें। गण्ड मूल दोपहर 12:37 तक है, अतः प्रातः के बड़े निर्णयों में विशेष सावधानी बरतें।

🌙 21 मार्च 2026 — राशि और नक्षत्र विवरण

विवरणराशि / नक्षत्रसमय
मूनसाइन (चन्द्र राशि)मेष (Aries)सम्पूर्ण दिन
सूर्य राशि (Sunsign)मीन (Pisces)
चन्द्र नक्षत्र — पूर्वअश्विनी08:01 प्रातः तक
नक्षत्र पादअश्विनी → भरणी01:34 दोपहर → 07:06 दोपहर
नक्षत्र पाद (अगला)अश्विनी → भरणी12:37 दोपहर (22 मार्च)
सूर्य नक्षत्रउत्तर भाद्रपद05:54 दोपहर तक (22 मार्च)
सूर्य पादउत्तर भाद्रपद → अश्विनी12:37 दोपहर से (22 मार्च)

अश्विनी नक्षत्र केतु के अधिपत्य में है — यह नई शुरुआत, उपचार और शीघ्रता का प्रतीक है। भरणी नक्षत्र शुक्र के प्रभाव में आता है जो रचनात्मकता, सृजन और परिवर्तन का सूचक है। आज दोपहर के बाद नक्षत्र परिवर्तन होने से आरम्भिक कार्यों में तेज़ी आयेगी।

📆 हिंदू कैलेण्डर एवं संवत विवरण — 21 मार्च 2026

कैलेण्डर विवरणमान
विक्रम संवत2083 सिद्धार्थी
शक संवत1948 परिधावी
गुजराती संवत2082 पिंगल
चन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
सूर्यमासमीन → मेष (संक्रमण काल)
सम्वत्सरसिद्धार्थी (21 अप्रैल 2026 तक)
चन्द्रमास (Chandramasa)चैत्र – पूर्णिमान्त

हम विक्रम संवत 2083 के अन्तिम चरण में हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 आरम्भ होगा। हिंदू कैलेण्डर 2026 की सम्पूर्ण जानकारी पढ़ें और आगामी व्रत-त्यौहार की तैयारी करें।

🌿 ऋतु एवं अयन — 21 मार्च 2026

विवरणमान
दृक ऋतुवसन्त (Spring)
वैदिक ऋतुवसन्त (Spring)
दृक अयनउत्तरायण
वैदिक अयनउत्तरायण
मध्याह्न12:28 दोपहर

आज वसन्त ऋतु और उत्तरायण का संयोग है। उत्तरायण में देवता जागृत अवस्था में माने जाते हैं। यह तीर्थ यात्रा के लिए अत्युत्तम समय है। चार धाम यात्रा 2026 का सम्पूर्ण गाइड पढ़ें और अभी से योजना बनाएँ।

🧭 दिशा शूल, निवास और शूल — 21 मार्च 2026

विवरणदिशा / स्थानटिप्पणी
होमाहुति (सूर्य)पूर्व (East) — 12:37 तक (22 मार्च)
चन्द्र वासपूर्व (East)
राहु वासपूर्व (East)
शिवावाससभा में — रात 11:56 बजे तक
शिवावास (बाद में)क्रीड़ा में
अग्निवास (पृथ्वी)पूर्व (East)
कुम्भ चक्रपूर्व ❌इस दिशा में यात्रा न करें

🧭 दिशा शूल: आज शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा अशुभ मानी जाती है। यदि अत्यन्त आवश्यक हो तो यात्रा से पूर्व भगवान का स्मरण करें और दही-चीनी खाकर निकलें।

🔱 21 मार्च 2026 का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

शनिवार — शनिदेव एवं हनुमान जी का दिन

शनिवार को शनिदेव की पूजा से शनि के दुष्प्रभाव से रक्षा होती है। इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, काली उड़द का दान करें और शनि चालीसा का पाठ करें। साथ ही हनुमान जी की पूजा से भी शनि की साढ़ेसाती और ढैया का प्रकोप शान्त होता है। हनुमान चालीसा — सम्पूर्ण पाठ और फायदे आज अवश्य पढ़ें।

शुक्ल तृतीया — माँ गौरी का विशेष दिन

शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि माँ पार्वती (गौरी) को समर्पित है। इसे सौभाग्य तृतीया भी कहते हैं। सुहागिन स्त्रियाँ आज व्रत रखकर माँ गौरी की पूजा करें — हरी चूड़ियाँ, सिन्दूर और हरी सब्जी अर्पित करें। अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

चैत्र नवरात्रि — बस कुछ दिन शेष

आज से कुछ दिनों बाद चैत्र नवरात्रि 2026 आरम्भ होगी। माँ दुर्गा की नव शक्तियों की आराधना के इस महापर्व की तैयारी अभी शुरू करें। चैत्र नवरात्रि 2026 — पूजा विधि, कलश स्थापना मुहूर्त और व्रत नियम पढ़ें। माँ दुर्गा के 9 रूप और 9 चमत्कार वाला लेख भी अवश्य पढ़ें।

हिंदू नव वर्ष और राम नवमी का उत्सव

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 का उत्सव आयेगा। Happy Navratri 2026 — हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ पढ़ें और अपने प्रियजनों को शेयर करें। राम नवमी 2026 — तिथि, मुहूर्त और हिंदू नववर्ष का रहस्य भी पढ़ें।

👑 मन्त्री मण्डल — विक्रम संवत 2083

पदग्रहक्षेत्र
राजा (King)गुरु (बृहस्पति)
मन्त्रीमंगलमन्त्रिमण्डल
सेनाधिपतिचन्द्रकमाण्डर-इन-चीफ
धान्याधिपतिबुधरबी फसल
मेघाधिपतिचन्द्रवर्षा एवं बादल
धनाधिपतिगुरुधन एवं अर्थव्यवस्था
निरसाधिपतिगुरुधातु एवं खनिज
रसाधिपतिशनिरस एवं द्रव पदार्थ
फलाधिपतिचन्द्रफल एवं पुष्प

🕉️ आनन्दादि एवं तमिल योग — 21 मार्च 2026

योगस्थितिसमय
आनन्दादि योगसौम्य (12:37 तक, 22 मार्च)
तमिल योगसिद्ध (12:37 तक, 22 मार्च)
जीवनामअर्ध जीवनसम्पूर्ण दिन
नेत्रमाअन्धसम्पूर्ण दिन
मरण12:37 के बाद (22 मार्च)

🪔 आज के लिए विशेष पूजा उपाय — शनिवार 21 मार्च 2026

शनिदेव की प्रसन्नता के लिए

आज शनिवार को पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएँ और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। शनि को प्रसन्न करने के लिए काले तिल, काली उड़द, लोहा और नीले वस्त्र का दान करें।

हनुमान जी की पूजा अवश्य करें

शनिवार को संकटमोचन हनुमान जी की पूजा से हर बाधा दूर होती है। हनुमान जी को सिन्दूर, चमेली का तेल और लड्डू अर्पित करें। हनुमान चालीसा का सम्पूर्ण पाठ करें — इससे शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।

एकादशी व्रत की तैयारी

शुक्ल पक्ष की एकादशी शीघ्र आने वाली है। एकादशी व्रत 2026 — सम्पूर्ण सूची, विधि और कथा पढ़कर अभी से तैयारी शुरू करें। एकादशी व्रत कथा और महिमा भी पढ़ें।

घर में पूजा कक्ष की व्यवस्था

नवरात्रि से पूर्व घर में पवित्र पूजा स्थल बनाना अत्यन्त शुभ होता है। पूजा रूम सेटअप गाइड 2026 (USA/UK के लिए भी) पढ़ें।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — 21 मार्च 2026 पंचांग

Q1. 21 मार्च 2026 को कौन सी तिथि है?

21 मार्च 2026 को शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि रात 11:56 बजे तक है और उसके बाद चतुर्थी तिथि आरम्भ होगी।

Q2. 21 मार्च 2026 का नक्षत्र क्या है?

आज अश्विनी नक्षत्र दोपहर 12:37 बजे तक है। उसके बाद भरणी नक्षत्र आरम्भ होगा (22 मार्च)।

Q3. आज राहु काल कब है? (21 मार्च 2026)

शनिवार 21 मार्च 2026 को राहु काल प्रातः 09:26 से 10:57 बजे तक रहेगा। इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं।

Q4. 21 मार्च 2026 को ब्रह्म मुहूर्त कब है?

आज ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:49 से 05:37 बजे तक रहेगा। यह पूजा, ध्यान और अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है।

Q5. 21 मार्च 2026 को अभिजित मुहूर्त कब है?

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:53 बजे तक है। यह दिन का सर्वोत्तम शुभ समय है।

Q6. 21 मार्च 2026 कौन सा हिंदू माह है?

आज चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी है।

Q7. शनिवार को किस देवता की पूजा करें?

शनिवार को शनिदेव और हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी होती है। सरसों के तेल का दीपक जलाएँ और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

Q8. 21 मार्च 2026 को गण्ड मूल कब तक है?

आज गण्ड मूल प्रातः 06:24 से दोपहर 12:37 बजे तक है (अश्विनी नक्षत्र के कारण)। दोपहर 12:37 के बाद गण्ड मूल समाप्त हो जायेगा।


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"जय माँ गंगे। हर हर महादेव। जय शनिदेव।"