एकादशी व्रत 2026 — सम्पूर्ण सूची, विधि, कथा और खाने के नियम | Shree Gangasagar

2026 की सभी 24 एकादशियों की तिथि, नाम और महत्व। एकादशी व्रत विधि, क्या खाएं क्या न खाएं, निर्जला एकादशी और देवउठनी एकादशी की जानकारी।

एकादशी व्रत 2026

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एकादशी व्रत 2026

सम्पूर्ण सूची, व्रत विधि, कथा, खाने के नियम और हर एकादशी का महत्व

— भगवान विष्णु को सबसे प्रिय व्रत —

📅 साल 2026 में कुल 24 एकादशियाँ होती हैं — हर महीने 2 (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष)

🙏 एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है — यह हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण व्रत है

⭐ निर्जला एकादशी — सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी एकादशी

🌿 व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं — सब कुछ इस article में


एकादशी व्रत क्या है? — परिचय

एकादशी का मतलब होता है — ग्यारहवीं तिथि। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो पक्ष होते हैं — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। इस तरह साल में कुल 24 एकादशियाँ आती हैं।


एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास और जागरण करने से जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


हर एकादशी का अपना अलग नाम, अपनी कथा और अपना विशेष महत्व होता है। आइए 2026 की सभी एकादशियों की सम्पूर्ण जानकारी देखते हैं।


एकादशी व्रत 2026 — सम्पूर्ण सूची (सभी 24 एकादशियाँ)

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नीचे दी गई सारणी में 2026 की सभी एकादशियों की तिथि, नाम और पक्ष दिए गए हैं:

तिथि

एकादशी का नाम

पक्ष / माह

विशेष महत्व

14 जनवरी 2026

सफला एकादशी

कृष्ण पक्ष — पौष

हर मनोकामना पूर्ण होती है

30 जनवरी 2026

पुत्रदा एकादशी

शुक्ल पक्ष — पौष

पुत्र प्राप्ति की कामना

13 फरवरी 2026

षट्तिला एकादशी

कृष्ण पक्ष — माघ

तिल दान का विशेष महत्व

28 फरवरी 2026

जया एकादशी

शुक्ल पक्ष — माघ

पाप नाश, स्वर्ग प्राप्ति

15 मार्च 2026

विजया एकादशी

कृष्ण पक्ष — फाल्गुन

हर काम में विजय मिलती है

30 मार्च 2026

आमलकी एकादशी

शुक्ल पक्ष — फाल्गुन

आँवले की पूजा, दीर्घायु

13 अप्रैल 2026

पापमोचनी एकादशी

कृष्ण पक्ष — चैत्र

सभी पापों से मुक्ति

28 अप्रैल 2026

कामदा एकादशी

शुक्ल पक्ष — चैत्र

इच्छाएं और काम पूर्ण होते हैं

13 मई 2026

वरूथिनी एकादशी

कृष्ण पक्ष — वैशाख

कठिन व्रत — महापुण्यदायी

28 मई 2026

मोहिनी एकादशी

शुक्ल पक्ष — वैशाख

मोह से मुक्ति, भक्ति प्राप्ति

11 जून 2026

अपरा एकादशी

कृष्ण पक्ष — ज्येष्ठ

अपार पुण्य की प्राप्ति

26 जून 2026

निर्जला एकादशी ⭐

शुक्ल पक्ष — ज्येष्ठ

सबसे महत्वपूर्ण! बिना जल के व्रत

11 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी

कृष्ण पक्ष — आषाढ़

योगिनी दोष से मुक्ति

25 जुलाई 2026

देवशयनी एकादशी

शुक्ल पक्ष — आषाढ़

चातुर्मास शुरू — बहुत पवित्र

09 अगस्त 2026

कामिका एकादशी

कृष्ण पक्ष — श्रावण

भगवान विष्णु की विशेष कृपा

24 अगस्त 2026

श्रावण पुत्रदा एकादशी

शुक्ल पक्ष — श्रावण

संतान सुख और सौभाग्य

07 सितम्बर 2026

अजा एकादशी

कृष्ण पक्ष — भाद्रपद

अजन्मे पापों से मुक्ति

22 सितम्बर 2026

परिवर्तिनी एकादशी

शुक्ल पक्ष — भाद्रपद

विष्णु जी करवट बदलते हैं

07 अक्टूबर 2026

इन्दिरा एकादशी

कृष्ण पक्ष — आश्विन

पितरों की मुक्ति होती है

22 अक्टूबर 2026

पापांकुशा एकादशी

शुक्ल पक्ष — आश्विन

पाप नाश — देवउठनी से पहले

05 नवंबर 2026

रमा एकादशी

कृष्ण पक्ष — कार्तिक

लक्ष्मी जी की कृपा

20 नवम्बर 2026

देवउठनी एकादशी ⭐

शुक्ल पक्ष — कार्तिक

विष्णु जी जागते हैं! विवाह शुरू

05 दिसम्बर 2026

उत्पन्ना एकादशी

कृष्ण पक्ष — मार्गशीर्ष

एकादशी देवी का जन्म दिन

20 दिसम्बर 2026

मोक्षदा एकादशी

शुक्ल पक्ष — मार्गशीर्ष

गीता जयंती — मोक्ष की प्राप्ति


2026 की 5 सबसे महत्वपूर्ण एकादशियाँ

1. 🌟 निर्जला एकादशी — 26 जून 2026 (सबसे बड़ी एकादशी)

निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहते हैं। यह साल की सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी एकादशी है। इस दिन पानी भी नहीं पिया जाता — न खाना, न पानी। जो इस एकादशी का व्रत करता है, उसे साल की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है।

⭐ निर्जला = बिना जल के। पूरे दिन कुछ नहीं खाते-पीते

⭐ यह व्रत महाभारत के भीम ने किया था — इसलिए भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं

⭐ इस एकादशी पर जल, छाता, पंखा और जूते दान करना बहुत पुण्यदायी है

⭐ अगर 24 एकादशियाँ न कर पाएं तो सिर्फ यह एक एकादशी सब का फल देती है


2. 🌟 देवउठनी एकादशी — 20 नवम्बर 2026

देवउठनी एकादशी को 'देवप्रबोधिनी एकादशी' भी कहते हैं। चार महीने की नींद (चातुर्मास) के बाद इस दिन भगवान विष्णु जागते हैं। इस दिन से शादी-विवाह, मुंडन और नए काम शुरू होते हैं।

⭐ इस दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन होता है

⭐ देवउठनी के बाद से विवाह के मुहूर्त शुरू होते हैं

⭐ इस दिन गन्ना, आँवला और सिंघाड़ा चढ़ाने का विशेष महत्व है


3. 🌟 देवशयनी एकादशी — 25 जुलाई 2026

इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं। यहाँ से चातुर्मास शुरू होता है। इस दिन के बाद से 4 महीने तक विवाह आदि शुभ कार्य बंद हो जाते हैं।

⭐ आषाढ़ शुक्ल एकादशी = चातुर्मास की शुरुआत

⭐ इस दिन पीले रंग के फूल और पीले वस्त्र भगवान विष्णु को चढ़ाएं

⭐ इस दिन व्रत से 4 महीने के चातुर्मास का पुण्य मिलता है


4. 🌟 मोक्षदा एकादशी — 20 दिसम्बर 2026 (गीता जयंती)

मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिन गीता जयंती मनाई जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से पितरों को मोक्ष मिलता है।


5. 🌟 कामदा एकादशी — 28 अप्रैल 2026

चैत्र शुक्ल एकादशी यानी कामदा एकादशी — यह नवरात्रि के तुरंत बाद आती है। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और राक्षस योनि से मुक्ति मिलती है।


एकादशी व्रत की सही विधि — step by step

दशमी (एक दिन पहले) की रात को करें

  • रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लें

  • मांस, मछली, अण्डा, प्याज, लहसुन बिल्कुल न खाएं

  • रात को सात्विक भोजन लें — दाल, रोटी, सब्जी

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें


एकादशी के दिन (सुबह)

  1. सूर्योदय से पहले उठें — ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।

  2. साफ पीले या सफेद कपड़े पहनें।

  3. भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

  4. तुलसी के पत्ते, पीले फूल, पंचामृत और मिठाई चढ़ाएं।

  5. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।

  6. विष्णु सहस्रनाम या एकादशी की कथा पढ़ें।

  7. पूरे दिन व्रत रखें — अन्न न खाएं।

  8. शाम को फिर से आरती और भजन करें।


द्वादशी (अगले दिन) — पारण

पारण यानी व्रत तोड़ना। द्वादशी को सुबह सूर्योदय के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण करें। पारण में पहले तुलसी का पानी पिएं, फिर भोजन करें।

⚠️ जरूरी: पारण सही समय पर करना बहुत आवश्यक है — देर से पारण करने पर व्रत का पुण्य कम होता है

⚠️ पारण में पहले ब्राह्मण को या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं

⚠️ पारण में चावल, मूंग की दाल और तिल विशेष रूप से शुभ हैं


एकादशी व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं

✅ खा सकते हैं

❌ नहीं खा सकते

फल — केला, सेब, अनार, पपीता, आम

गेहूँ, चावल, मैदा, सूजी, जौ (सभी अनाज)

साबूदाना खिचड़ी / खीर / वड़ा

दाल — मसूर, चना, मूंग, उड़द

कुट्टू के आटे की पूड़ी और पकौड़ी

प्याज, लहसुन, अदरक

सिंघाड़े के आटे का हलवा / पूड़ी

मांस, मछली, अण्डा

मखाना — तला हुआ या खीर में

सामान्य नमक — केवल सेंधा नमक लें

आलू, शकरकंद, अरबी, कच्चा केला

तम्बाकू और शराब

दूध, दही, पनीर, लस्सी, छाछ

हींग, सरसों, मेथी के बीज

मेवे — काजू, बादाम, किशमिश, अखरोट

बाज़ार के namkeen / packaged snacks

नारियल और नारियल पानी

मुनक्का और खजूर (कुछ लोग मानते हैं)


💡 टिप: निर्जला एकादशी में पानी भी नहीं पिया जाता — बाकी सभी एकादशियों में फलाहार कर सकते हैं

💡 टिप: अगर बीमार हों, बच्चे हों या बुजुर्ग हों तो फल और दूध लेना उचित है

💡 टिप: सेंधा नमक ही प्रयोग करें — यह व्रत में शुद्ध माना जाता है


एकादशी व्रत की कथा — क्यों रखते हैं यह व्रत?

एकादशी देवी की उत्पत्ति की कथा

बहुत पुराने समय की बात है। मुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था। उसने देवताओं को परेशान कर रखा था। सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए और मदद माँगी।


भगवान विष्णु और मुर का युद्ध हुआ। युद्ध बहुत लंबा चला। भगवान विष्णु थक गए और एक गुफा में सो गए। मुर ने सोते हुए भगवान पर हमला करने की कोशिश की।


तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी प्रकट हुईं। उन्होंने मुर का वध कर दिया। भगवान विष्णु जागे और उस देवी से पूछा — 'तुम कौन हो?' देवी ने कहा — 'मैं आपकी शक्ति से उत्पन्न हुई हूँ।'


भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा — 'तुमने मुर को मारा इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। जो भी एकादशी के दिन व्रत रखेगा, उसे मोक्ष मिलेगा और मैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करूँगा।'


🙏 इसीलिए एकादशी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि माना जाता है

🙏 इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है

🙏 शास्त्रों में कहा है — 'एकादशी व्रत से बड़ा कोई व्रत नहीं है'


एकादशी व्रत के फायदे

फायदा

कैसे होता है

पापों से मुक्ति

एकादशी व्रत से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट होते हैं

मोक्ष की प्राप्ति

नियमित एकादशी व्रत से आत्मा को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है

पितरों की मुक्ति

एकादशी व्रत करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है

मनोकामना पूर्ति

भगवान विष्णु की कृपा से इच्छाएं पूरी होती हैं

स्वास्थ्य लाभ

उपवास से पाचन तंत्र साफ होता है, शरीर में नई ऊर्जा आती है

मानसिक शांति

भक्ति और ध्यान से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं

धन-समृद्धि

भगवान विष्णु (धन के देवता) की कृपा से आर्थिक स्थिति सुधरती है

संतान सुख

पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति में सहायक माना जाता है


एकादशी व्रत के खास नियम और टिप्स

✅ एकादशी की रात को जागरण करना चाहिए — भजन-कीर्तन में रात बिताएं

✅ इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ तुलसी माता की पूजा जरूर करें

✅ किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या जल दान करें — पुण्य दोगुना होता है

✅ व्रत में शांत और सकारात्मक रहें — झगड़ा, गाली या निंदा न करें

✅ एकादशी के दिन बाल और नाखून न काटें

✅ इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करते रहें

✅ शाम को तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं


❌ एकादशी के दिन चावल बिल्कुल न खाएं — यह सबसे बड़ा नियम है

❌ इस दिन किसी से झूठ न बोलें, किसी की बुराई न करें

❌ दशमी की रात से ही मांसाहार बंद कर दें

❌ व्रत के दिन दिन में न सोएं — इससे व्रत का फल कम होता है

❌ पारण (व्रत तोड़ना) द्वादशी समाप्त होने से पहले जरूर करें


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1: एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल में पाप का अंश होता है। एक कथा के अनुसार महर्षि मेधा ने चावल में अपनी आत्मा का अंश डाला था, इसलिए एकादशी को चावल खाना वर्जित है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपवास के दिन चावल जैसे भारी अनाज से बचना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

Q2: क्या बच्चे और बुजुर्ग एकादशी व्रत कर सकते हैं?

हाँ, कर सकते हैं। बच्चे और बुजुर्ग फलाहार व्रत कर सकते हैं — यानी फल, दूध, साबूदाना खा सकते हैं। पूरी तरह निर्जला व्रत की जरूरत नहीं है। बीमार व्यक्ति मन में भगवान का ध्यान करके भी व्रत का फल पा सकते हैं।

Q3: साल में कितनी एकादशियाँ होती हैं?

सामान्य साल में 24 एकादशियाँ होती हैं — हर महीने 2 (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की)। जिस साल अधिकमास (लीप महीना) आता है, उस साल 26 एकादशियाँ होती हैं। 2026 में 24 एकादशियाँ हैं।

Q4: एकादशी और द्वादशी में क्या फर्क है?

एकादशी = ग्यारहवीं तिथि — इस दिन व्रत रखते हैं। द्वादशी = बारहवीं तिथि — इस दिन व्रत तोड़ते हैं (पारण करते हैं)। पारण हमेशा द्वादशी को सूर्योदय के बाद और द्वादशी खत्म होने से पहले करना चाहिए।

Q5: सबसे बड़ी एकादशी कौन सी है?

निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी) को सबसे बड़ी और सबसे पुण्यदायी एकादशी माना जाता है। इस दिन बिना पानी के व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है। 2026 में यह 26 जून को है।

Q6: एकादशी व्रत में क्या दान करें?

एकादशी पर दान का विशेष महत्व है। इस दिन अनाज, वस्त्र, जूते-चप्पल, छाता, पानी और पैसे दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। निर्जला एकादशी पर पानी और ठंडी चीजें (छाछ, शरबत) दान करना विशेष फलदायी है।

Q7: एकादशी व्रत कब से शुरू करें — पहली बार?

कोई भी एकादशी से शुरू कर सकते हैं। पहले साल में जितनी एकादशियाँ हो सकें, उतनी करें। धीरे-धीरे नियमित हो जाएंगे। शुरुआत के लिए फलाहार व्रत करें — बाद में निर्जला या पूर्ण उपवास करें।


निष्कर्ष — भगवान विष्णु की कृपा पाएं 🙏

एकादशी व्रत हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र और फलदायी व्रत है। साल 2026 में 24 एकादशियाँ आ रही हैं — हर एकादशी का अपना अलग महत्व और फल है। अगर आप सभी नहीं कर सकते तो कम से कम निर्जला एकादशी, देवउठनी एकादशी और देवशयनी एकादशी जरूर करें।


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🙏 जय श्री हरि! जय भगवान विष्णु! हरि ॐ तत् सत्!