Chhatrapati Shivaji Jayanti 2026: 19 फरवरी का पंचांग और स्वराज्य का इतिहास
19 फरवरी, 2026 को भारतभर में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती मनाई जाएगी। यह दिन न केवल इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है।
यहाँ 19 फरवरी 2026 का विस्तृत पंचांग और एक विशेष लेख दिया गया है जो जानकारी और श्रद्धा का संगम है।
📅 19 फरवरी, 2026 का पंचांग (Panchang)
कल का दिन धार्मिक कार्यों और नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है।
- तिथि: फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, द्वितीया (दोपहर 02:45 PM तक), उसके बाद तृतीया।
- नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (दोपहर 01:10 PM तक), फिर उत्तराभाद्रपद।
- योग: साध्य योग (रात 09:30 PM तक)।
- वार: गुरुवार (Brihaspativar) - जो कि गुरु और शिक्षा के लिए सर्वोत्तम है।
- सूर्योदय: सुबह 06:58 AM
- सूर्यास्त: शाम 06:14 PM
🔴 शुभ और अशुभ समय (Muhurat)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 PM से 12:58 PM (किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
- राहुकाल: दोपहर 01:59 PM से 03:24 PM (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित हैं)।
| 📅 दैनिक पंचांग: 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) | |
|---|---|
| तिथि (Tithi) | फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, द्वितीया (02:45 PM तक) |
| नक्षत्र (Nakshatra) | पूर्वाभाद्रपद (01:10 PM तक) |
| योग (Yoga) | साध्य योग (09:30 PM तक) |
| सूर्योदय (Sunrise) | 06:58 AM |
| सूर्यास्त (Sunset) | 06:14 PM |
| अभिजीत मुहूर्त | 12:13 PM - 12:58 PM |
| राहुकाल (Rahukaal) | 01:59 PM - 03:24 PM |
| विशेष उत्सव | 🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती |
🚩विशेष लेख: स्वराज्य के महानायक - छत्रपति शिवाजी महाराज
आज पूरा देश 'शिवाजी जयंती' के उत्सव में डूबा है। 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में जन्मा वह बालक केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक विचार बन गया जिसने मुगलों की सत्ता को हिलाकर रख दिया।
🛡️ 'जानें क्यों कहलाते हैं शिवाजी महाराज 'फादर ऑफ इंडियन नेवी'
शिवाजी महाराज ने 17वीं सदी में ही समझ लिया था कि भारत की लंबी तटरेखा की रक्षा के बिना स्वराज्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कोंकण तट पर विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग जैसे अभेद्य समुद्री किलों का निर्माण कराया और एक शक्तिशाली नौसेना तैयार की। इसी दूरदर्शिता के कारण उन्हें 'भारतीय नौसेना का जनक' कहा जाता है।
⚔️ गनिमी कावा (Guerrilla Warfare) की रणनीति
महाराज ने सिखाया कि युद्ध केवल संख्या बल से नहीं, बल्कि बुद्धि से जीता जाता है। उनकी 'गनिमी कावा' तकनीक ने मुगलों की लाखों की सेना को सहयाद्रि की पहाड़ियों में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 'छापामार युद्ध' की उनकी नीतियां आज भी दुनिया भर की मिलिट्री अकादमियों में पढ़ाई जाती हैं।
⚖️ सुशासन और न्यायप्रिय राजा
शिवाजी महाराज का शासन 'रैयत' (जनता) का शासन था।
अष्टप्रधान मंडल: उन्होंने शासन चलाने के लिए 8 मंत्रियों की एक परिषद बनाई, जो आज के कैबिनेट सिस्टम जैसा था।
महिला सम्मान: उन्होंने सख्त नियम बनाए थे कि युद्ध के दौरान भी किसी महिला या बच्चे को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।
धार्मिक सहिष्णुता: उनके प्रशासन में कई मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर थे, जो उनके न्यायपूर्ण होने का प्रमाण है।
🔱 आज के युवाओं के लिए संदेश
शिवाजी जयंती केवल ढोल-ताशों का त्योहार नहीं है, बल्कि उनके 'मैनेजमेंट स्किल्स' और 'कभी न हार मानने वाले जज्बे' को आत्मसात करने का दिन है। उन्होंने शून्य से विश्व खड़ा किया, जो हमें सिखाता है कि संसाधन कम हों तो भी संकल्प बड़ा होना चाहिए।
