आज का पंचांग: 1 मार्च 2026, रविवार | दिल्ली पंचांग और आमलकी एकादशी पारण विधि
1 मार्च 2026 को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। रविवार का दिन होने के कारण आज भगवान सूर्य देव की उपासना का विशेष फल मिलता है
1 मार्च 2026 को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। रविवार का दिन होने के कारण आज भगवान सूर्य देव की उपासना का विशेष फल मिलता है। साथ ही, आज उन सभी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण दिन है जिन्होंने कल आमलकी एकादशी का व्रत रखा था, क्योंकि आज व्रत का पारण किया जाएगा।
📅 दिल्ली पंचांग: 1 मार्च 2026 (रविवार)
✅ शुभ मुहूर्त और पारण समय (Shubh Muhurat)
- आमलकी एकादशी पारण समय: सुबह 06:46 से 09:05 के बीच (दिल्ली समय)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:57 तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:06 से 05:56 तक
- रवि पुष्य योग: सूर्योदय से शाम 05:07 तक (खरीदारी और नए कार्यों के लिए महामुहूर्त)
🚫 अशुभ समय (Avoid this time)
- राहुकाल: शाम 04:56 से 06:22 तक
- यमगण्ड: दोपहर 12:34 से 02:00 तक
🌟 धार्मिक महत्व और आज के उपाय
आज पुष्य नक्षत्र का रविवार के साथ संयोग 'रवि-पुष्य योग' बना रहा है, जिसे तंत्र और ज्योतिष में सिद्धियों का प्रदाता माना गया है।
विशेष उपाय (Remedies for Success):
- एकादशी पारण: व्रत का पारण भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करके और ब्राह्मण को दान देकर ही करें। आज के भोजन में आंवले का प्रयोग करना श्रेष्ठ है।
- सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में लाल चंदन और गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे मान-सम्मान और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
- पुष्य नक्षत्र पूजन: आज स्वर्ण (Gold) या धार्मिक पुस्तकें खरीदना अत्यंत शुभ है। 'ॐ नमो नारायणाय' का जाप करें।
सारांश (Conclusion)
आज का पंचांग (1 मार्च 2026):
- तिथि: फाल्गुन शुक्ल द्वादशी (रात 01:45 तक)
- नक्षत्र: पुष्य (शाम 05:07 तक)
- शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:57 तक
- राहुकाल: शाम 04:56 से 06:22 तक
विशेष उपाय:
आज भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें और 'ॐ नमो नारायणाय' का जाप करें। पारण समय का विशेष ध्यान रखें।
एकादशी की व्रत कथा 👈 यहां पढ़ें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: आमलकी एकादशी का पारण कब करना चाहिए?
उत्तर: आमलकी एकादशी का पारण 1 मार्च 2026 को सुबह 06:46 से 09:05 के बीच करना सबसे शुभ रहेगा।
Q2. पुष्य नक्षत्र कब तक है?
उत्तर:आज पुष्य नक्षत्र शाम 05:07 तक रहेगा, जिसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा।
