आज का पंचांग 18 मार्च 2026 — बुधवार | दर्श अमावस्या | तिथि, नक्षत्र, राहुकाल | Shree GangaSagar

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आज का पंचांग 18 मार्च 2026 — बुधवार | दर्श अमावस्या | तिथि, नक्षत्र, राहुकाल | ShreeGangaSagar
Aaj ka panchang 18 March 2026

📅 आज का पंचांग — नई दिल्ली
बुधवार, 18 मार्च 2026
फाल्गुन कृष्ण पक्ष • चतुर्दशी • विक्रम संवत 2082 कलायुक्त
🌑 आज: दर्श अमावस्या • अन्वधान — पितृ तर्पण का पवित्र दिन
🌅 सूर्योदय
06:28 AM
🌇 सूर्यास्त
06:31 PM
🌙 चन्द्रोदय
चन्द्रोदय नहीं
🌑
आज चन्द्रोदय नहीं — अमावस्या तिथि का संकेत

आज 18 मार्च को चन्द्रोदय नहीं है। यह अमावस्या का विशेष लक्षण है। इसके साथ ही आज अभिजित मुहूर्त भी नहीं है (None) — इसलिए नया कार्य आरंभ करने से बचें।

📿 आज का पंचांग विवरण
तिथि
चतुर्दशी
08:25 AM तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा
05:21 AM तक (19 मार्च)
योग
शुभ
04:01 AM तक (19 मार्च)
करण
शकुनि / चतुष्पद
शकुनि 08:25 AM • चतुष्पद 07:43 PM तक
वार
बुधवार
बुध ग्रह — बुद्धि और विद्या
सूर्य राशि / चन्द्र राशि
मीन / कुम्भ
कुम्भ 11:36 PM तक
अभिजित मुहूर्त
आज नहीं
अमावस्या पर अभिजित नहीं होता
प्रविष्ट/गेट
गेट 4
यात्रा मार्ग निर्धारण
⏰ शुभ-अशुभ काल — आज का
🚫 राहुकाल
12:29 PM — 02:00 PM
शुभ कार्य वर्जित
⚠️ गुलिकाकाल
10:59 AM — 12:29 PM
महत्वपूर्ण निर्णय न लें
⚠️ यमगण्ड
07:58 AM — 09:28 AM
नया कार्य वर्जित
⚠️ दुर्मुहूर्त
12:05 PM — 12:53 PM
नई शुरुआत न करें
🌑 अभिजित
आज नहीं (None)
अमावस्या पर अभिजित नहीं
✅ अमृतकाल
09:37 PM — 11:10 PM
पितृ पूजा और तर्पण के लिए
🕐 वर्ज्यम
12:20 PM — 01:53 PM
यात्रा में सावधानी
🌿 शुभ योग
दिनभर (04:01 AM तक)
शुभ योग — पूजा शुभफलदायी
🌑 दर्श अमावस्या और अन्वधान — आज का विशेष महत्व

दर्श अमावस्या — "दर्श" का अर्थ है "देखना"। यह वह अमावस्या है जो मास के अंत में आती है और पितरों को "दर्शन" देने का अवसर माना जाता है। इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और पिण्डदान का विशेष महत्व है।

अन्वधान — यह एक विशेष कर्मकाण्ड है जो अमावस्या से एक दिन पहले (आज) किया जाता है। इसमें अगले मास के यज्ञ और व्रतों की तैयारी होती है। धार्मिक दृष्टि से आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है।

बुधवार + अमावस्या: बुध ग्रह बुद्धि का कारक है। आज की अमावस्या पर ज्ञान और विद्या के लिए प्रार्थना विशेष फलदायी है। विद्यार्थी आज सरस्वती की भी पूजा कर सकते हैं।

पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र: यह नक्षत्र अग्नि (आग) और उग्र शक्तियों से जुड़ा है। आज के दिन अग्नि से संबंधित कार्य और हवन विशेष फलदायी होते हैं।

🙏 पितृ तर्पण कैसे करें — सरल विधि
  • 1
    सुबह सूर्योदय के बाद स्नान करें — स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • 2
    घर में या पवित्र स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके बैठें।
  • 3
    तांबे के लोटे में जल, काले तिल, जौ और कुशा (दूब) लें।
  • 4
    "ॐ [पितर का नाम] तर्पयामि" — यह 3 बार कहते हुए दक्षिण दिशा में जल प्रवाहित करें।
  • 5
    यदि गंगा या किसी नदी पर जा सकें — वहाँ तर्पण अत्यंत पुण्यकारी है।
  • 6
    तर्पण के बाद पितरों की स्मृति में किसी को भोजन, वस्त्र या दान दें।
  • 7
    "ॐ पितृभ्यो नमः" का 108 बार जाप करें — पितर तृप्त होते हैं।
🌟 आज का शुभ-अशुभ समय
✅ पितृ तर्पण
सुबह — कुतुप मुहूर्त
11:30 AM — 12:17 PM
✅ अमृतकाल
रात्रि पूजा
09:37 PM — 11:10 PM
✅ शुभ योग
सुबह का समय
06:28 AM — दोपहर तक
🚫 राहुकाल
कोई कार्य नहीं
12:29 PM — 02:00 PM
🌑 कोई अभिजित नहीं
आज None है
अमावस्या पर वर्जित
⚠️ दुर्मुहूर्त
नया कार्य नहीं
12:05 PM — 12:53 PM
💡 आज क्या करें — क्या न करें
  • पितृ तर्पण करें — यह आज का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। गंगाजल या नदी के जल से तर्पण करें।
  • पितरों की स्मृति में दान-पुण्य करें — गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन दें।
  • गाय को रोटी और तिल खिलाएं — इससे पितर तृप्त होते हैं।
  • आज का शुभ योग — धार्मिक ग्रंथों का पाठ और ध्यान के लिए आज उत्तम है।
  • अन्वधान — अगले मास के धार्मिक कार्यों की योजना बनाएं।
  • 🚫
    आज अभिजित मुहूर्त नहीं है — कोई भी नया शुभ कार्य शुरू न करें।
  • 🚫
    राहुकाल (12:29–2:00 PM) में यात्रा और व्यापार न करें।
  • 🚫
    अमावस्या पर माँस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
  • 💛
    बुधवार है — विद्यार्थी आज सरस्वती माँ की पूजा करें और हरे रंग का उपयोग करें।
✦ आज का मंत्र — दर्श अमावस्या, पितृ तर्पण ✦

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
ॐ पितृभ्यो देवताभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥

हे पितर देवताओं! स्वधा (पितरों का अन्न) को धारण करने वालों को नमस्कार। महायोगियों को नमस्कार। स्वधा और स्वाहा को सदा नमस्कार करता हूँ।
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सनातन भक्ति का डिजिटल तीर्थ 🙏 | स्रोत: drikpanchang.com | नई दिल्ली

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